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श्लोक  6.128.100 
सर्वं मुदितमेवासीत् सर्वो धर्मपरोऽभवत्।
राममेवानुपश्यन्तो नाभ्यहिंसन् परस्परम्॥ १००॥
 
 
अनुवाद
सब लोग सदा प्रसन्न रहते थे। सब लोग धर्मात्मा थे और एक दूसरे को कभी दुःख नहीं देते थे। सबकी दृष्टि भगवान राम पर ही लगी रहती थी।॥100॥
 
Everyone was always happy. All were religious and never caused pain to one another, keeping their eyes fixed on Lord Rama.॥ 100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)