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ramayan 6.128.10: ‘तुम्हें नाना प्रकार के वाद्यों की मधुर ध्वनि, पायल और घुंघरू की झंकार और गीतों के सुन्दर शब्दों के साथ सोना और जागना चाहिए।॥ 10॥   |   ramayan सर्ग 6.128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.128.10 
तूर्यसंघातनिर्घोषै: काञ्चीनूपुरनि:स्वनै:।
मधुरैर्गीतशब्दैश्च प्रतिबुध्यस्व शेष्व च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हें नाना प्रकार के वाद्यों की मधुर ध्वनि, पायल और घुंघरू की झंकार और गीतों के सुन्दर शब्दों के साथ सोना और जागना चाहिए।॥ 10॥
 
‘You should sleep and wake up to the sweet sounds of various musical instruments, the tinkling of anklets and anklets and the beautiful words of songs.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)