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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य
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श्लोक 1
श्लोक
6.128.1
शिरस्यञ्जलिमाधाय कैकेयीनन्दिवर्धन:।
बभाषे भरतो ज्येष्ठं रामं सत्यपराक्रमम्॥ १॥
अनुवाद
तत्पश्चात् कैकेयी नन्दन भरत ने अंजलि को अपने मस्तक पर बाँध लिया और अपने बड़े भाई सत्यपराक्रमी श्री राम से बोले -
After that, Kaikeyi Nandan Bharat tied Anjali on his head and said to his elder brother Satyaprakrami Shri Ram –
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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