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ramayan 6.127.58: अपने भाई के प्रिय भरत को ऐसा कहते देख, समस्त वानर और राक्षसराज विभीषण भी आँसू बहाने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  6.127.58 
तथा ब्रुवाणं भरतं दृष्ट्वा तं भ्रातृवत्सलम्।
मुमुचुर्वानरा बाष्पं राक्षसश्च विभीषण:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
अपने भाई के प्रिय भरत को ऐसा कहते देख, समस्त वानर और राक्षसराज विभीषण भी आँसू बहाने लगे।
 
Seeing Bharata, the loving brother of his brother, saying this, all the monkeys and the king of demons, Vibhishana, began to shed tears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)