Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.127.54-55h: तत्पश्चात् धर्म के ज्ञाता भरत ने स्वयं श्री राम की उन चरण पादुकाओं को लेकर उन महाराज के चरणों में रख दिया और हाथ जोड़कर उनसे कहा - ॥54 1/2॥ | ramayan सर्ग 6.127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पादुके ते तु रामस्य गृहीत्वा भरत: स्वयम्।
चरणाभ्यां नरेन्द्रस्य योजयामास धर्मवित्॥ ५४॥
अब्रवीच्च तदा रामं भरत: स कृताञ्जलि:।
अनुवाद
तत्पश्चात् धर्म के ज्ञाता भरत ने स्वयं श्री राम की उन चरण पादुकाओं को लेकर उन महाराज के चरणों में रख दिया और हाथ जोड़कर उनसे कहा - ॥54 1/2॥
Thereafter Bharata, the knower of Dharma, himself took those sandals of Shri Ram and placed them on the feet of that Maharaja and with folded hands said to him - ॥ 54 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥