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ramayan 6.127.39: इतने में ही श्री रामचन्द्रजी की अनुमति पाकर वह महान् विमान बड़े वेग और हंस के साथ पृथ्वी पर उतरा।   |   ramayan सर्ग 6.127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.127.39 
ततो रामाभ्यनुज्ञातं तद् विमानमनुत्तमम्।
हंसयुक्तं महावेगं निपपात महीतलम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
इतने में ही श्री रामचन्द्रजी की अनुमति पाकर वह महान् विमान बड़े वेग और हंस के साथ पृथ्वी पर उतरा।
 
Meanwhile, after receiving the permission of Shri Ramchandraji, that great aircraft with great speed and a swan descended on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)