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ramayan 6.127.32: 'यह विमान जो श्रीराम का वाहन है, प्रातःकालीन सूर्य के समान चमक रहा है। इसकी गति मन के समान है। यह दिव्य विमान ब्रह्माजी की कृपा से कुबेर को प्राप्त हुआ था।' 32.   |   ramayan सर्ग 6.127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.127.32 
तरुणादित्यसंकाशं विमानं रामवाहनम्।
धनदस्य प्रसादेन दिव्यमेतन्मनोजवम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'यह विमान जो श्रीराम का वाहन है, प्रातःकालीन सूर्य के समान चमक रहा है। इसकी गति मन के समान है। यह दिव्य विमान ब्रह्माजी की कृपा से कुबेर को प्राप्त हुआ था।' 32.
 
‘This plane which is the vehicle of Shri Ram is shining like the morning sun. Its speed is like the mind. This divine plane was obtained by Kubera by the grace of Brahmaji. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)