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ramayan 6.126.48: फिर जैसे प्रलयकाल में संवर्तक नामक अग्निदेव सम्पूर्ण जगत् का नाश करने के लिए तत्पर हो जाते हैं, उसी प्रकार सेना को उत्साहित करते हुए श्री राम ने लंकापुरी का नाश करने का विचार किया॥48॥   |   ramayan सर्ग 6.126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  6.126.48 
उद्योजयिष्यन्नुद्योगं दध्रे लङ्कावधे मन:।
जिघांसुरिव लोकान्ते सर्वाँल्लोकान् विभावसु:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
फिर जैसे प्रलयकाल में संवर्तक नामक अग्निदेव सम्पूर्ण जगत् का नाश करने के लिए तत्पर हो जाते हैं, उसी प्रकार सेना को उत्साहित करते हुए श्री राम ने लंकापुरी का नाश करने का विचार किया॥48॥
 
Then, just as in the time of doomsday, the fire god named Samvartak gets ready to destroy the entire world, in the same way, while encouraging the army, Shri Ram thought of destroying Lankapuri. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)