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श्लोक  6.126.47 
श्रुत्वा तां मैथिलीं रामस्त्वाशशंसे च जीवितम्।
जीवितान्तमनुप्राप्त: पीत्वामृतमिवातुर:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार मरणासन्न रोगी अमृत पीकर पुनर्जीवित हो जाता है, उसी प्रकार सीता के वियोग में मरते हुए श्री राम को उनके विषय में शुभ समाचार मिलने पर जीवित होने की आशा हुई।
 
Just as a patient near death revives after drinking nectar, similarly Sri Rama, who was dying due to the separation from Sita, hoped to survive after receiving the good news about her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)