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ramayan 6.126.43: फिर मैं अपने दुःख में डूबे हुए भाइयों का दुःख दूर करने के लिए अपने बल और पराक्रम के बल पर सौ योजन समुद्र पार करके लंका में अशोक वाटिका में अकेली बैठी हुई सीता से मिला।   |   ramayan सर्ग 6.126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.126.43 
सोऽहं दु:खपरीतानां दु:खं तज्ज्ञातिनां नुदन्।
आत्मवीर्यं समास्थाय योजनानां शतं प्लुत:।
तत्राहमेकामद्राक्षमशोकवनिकां गताम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
फिर मैं अपने दुःख में डूबे हुए भाइयों का दुःख दूर करने के लिए अपने बल और पराक्रम के बल पर सौ योजन समुद्र पार करके लंका में अशोक वाटिका में अकेली बैठी हुई सीता से मिला।
 
Then, to alleviate the suffering of my brothers who were drowned in sorrow, I, by the help of my strength and valour, crossed a hundred yojanas of the sea and met Sita who was sitting alone in the Ashoka garden in Lanka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)