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श्लोक  6.126.42 
भ्राता तु गृध्रराजस्य सम्पातिर्नाम वीर्यवान्।
समाख्याति स्म वसतीं सीतां रावणमन्दिरे॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उसके बाद गृध्रराज जटायु की मुलाकात एक पराक्रमी भाई से हुई, जिसका नाम सम्पाती था। उसने बताया कि सीता लंका में रावण के घर में रहती हैं।
 
After that, Gridhraraj Jatayu met a mighty brother, whose name was Sampati. He told us that Sita resides in Ravana's house in Lanka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)