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ramayan 6.126.36-37: 'दोनों एक-दूसरे से मिलने से पहले ही बहुत घनिष्ठ मित्र बन गए थे। इससे पहले बड़े भाई बाली ने क्रोध में आकर सुग्रीव को घर से निकाल दिया था। जब श्रीराम और सुग्रीव ने आपस में बातचीत की, तो उनका प्रेम और भी अधिक प्रगाढ़ हो गया।॥ 36-37॥   |   ramayan सर्ग 6.126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  6.126.36-37 
तयो: समागम: पूर्वं प्रीत्या हार्दो व्यजायत॥ ३६॥
भ्रात्रा निरस्त: क्रुद्धेन सुग्रीवो वालिना पुरा।
इतरेतरसंवादात् प्रगाढ: प्रणयस्तयो:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'दोनों एक-दूसरे से मिलने से पहले ही बहुत घनिष्ठ मित्र बन गए थे। इससे पहले बड़े भाई बाली ने क्रोध में आकर सुग्रीव को घर से निकाल दिया था। जब श्रीराम और सुग्रीव ने आपस में बातचीत की, तो उनका प्रेम और भी अधिक प्रगाढ़ हो गया।॥ 36-37॥
 
‘The two had become very close friends even before they met each other. Earlier, the elder brother Vali had thrown Sugreev out of the house in a fit of rage. When Shri Ram and Sugreev talked to each other, their love grew even stronger.॥ 36-37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)