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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  6.126.30-31h 
तां सुवर्णपरिष्कारे शुभे महति वेश्मनि॥ ३०॥
प्रवेश्य मैथिलीं वाक्यै: सान्त्वयामास रावण:।
 
 
अनुवाद
वहाँ रावण ने मिथिला की राजकुमारी को सोने से सुसज्जित एक विशाल महल में ठहराया और मीठे वचनों से उसे सांत्वना देने लगा।
 
‘There Ravana lodged the princess of Mithila in a huge palace decorated with gold and began to console her with sweet words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)