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श्लोक  6.126.25 
अथ सौम्य दशग्रीवो मृगं याति तु राघवे।
लक्ष्मणे चापि निष्क्रान्ते प्रविवेशाश्रमं तदा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! जब श्री रघुनाथजी मृग के पीछे-पीछे जा रहे थे और लक्ष्मण भी उनका समाचार लेने के लिए कुटिया से बाहर आए, तब रावण ने आश्रम में प्रवेश किया।
 
Soumya! When Shri Raghunath was following the deer and Lakshmana also came out of the hut to get news of him, then Ravana entered the ashram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)