Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.126.16-17h: जनस्थान पर आकर शूर्पणखा नाम की एक राक्षसी (काम-ग्रस्त हृदय वाली) श्री रामचंद्रजी के पास आई। तब श्री राम ने लक्ष्मण को उसे दण्ड देने का आदेश दिया। महाबली लक्ष्मण सहसा उठे, अपनी तलवार उठाई और उस राक्षसी के नाक-कान काट डाले।   |   ramayan सर्ग 6.126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  6.126.16-17h 
पश्चाच्छूर्पणखा नाम रामपार्श्वमुपागता।
ततो रामेण संदिष्टो लक्ष्मण: सहसोत्थित:॥ १६॥
प्रगृह्य खड्गं चिच्छेद कर्णनासं महाबल:।
 
 
अनुवाद
जनस्थान पर आकर शूर्पणखा नाम की एक राक्षसी (काम-ग्रस्त हृदय वाली) श्री रामचंद्रजी के पास आई। तब श्री राम ने लक्ष्मण को उसे दण्ड देने का आदेश दिया। महाबली लक्ष्मण सहसा उठे, अपनी तलवार उठाई और उस राक्षसी के नाक-कान काट डाले।
 
‘After coming to Jansthan, a demoness named Shurpanakha (with lust in her heart) came to Shri Ramchandraji. Then Shri Ram ordered Lakshman to punish her. The mighty Lakshman suddenly got up, picked up his sword and cut off the nose and ears of that demoness. 16 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)