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ramayan 6.126.13: उन तीनों ने उस राक्षस को, जो हाथ ऊपर करके और मुँह नीचे करके तुरही बजाते हुए हाथी के समान जोर से गर्जना कर रहा था, मारकर एक गड्ढे में डाल दिया॥13॥   |   ramayan सर्ग 6.126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 126: हनुमान्जी का भरत को श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के वनवाससम्बन्धी सारे वृत्तान्तों को सुनाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.126.13 
तमुत्क्षिप्य महानादमूर्ध्वबाहुमधोमुखम्।
निखाते प्रक्षिपन्ति स्म नदन्तमिव कुञ्जरम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उन तीनों ने उस राक्षस को, जो हाथ ऊपर करके और मुँह नीचे करके तुरही बजाते हुए हाथी के समान जोर से गर्जना कर रहा था, मारकर एक गड्ढे में डाल दिया॥13॥
 
The three of them killed that demon who was roaring loudly like a trumpeting elephant with his arms up and face down and threw him into a pit.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)