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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.125.7 
भरतस्तु त्वया वाच्य: कुशलं वचनान्मम।
सिद्धार्थं शंस मां तस्मै सभार्यं सहलक्ष्मणम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'तुम भरत के पास जाओ और मेरी ओर से उनका कुशलक्षेम पूछो तथा उन्हें यह समाचार दो कि मैं अपनी इच्छा पूरी करके सीता और लक्ष्मण के साथ लौट आया हूँ।
 
‘Go to Bharata and inquire about his well-being on my behalf and inform him about my return with Sita and Lakshmana after having accomplished my desire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)