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ramayan 6.125.40: हनुमान के ऐसा कहते ही कैकेयी पुत्र भरत खुशी से अभिभूत होकर अचानक जमीन पर गिर पड़े और खुशी से बेहोश हो गए।   |   ramayan सर्ग 6.125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.125.40 
एवमुक्तो हनुमता भरत: कैकयीसुत:।
पपात सहसा हृष्टो हर्षान्मोहमुपागमत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हनुमान के ऐसा कहते ही कैकेयी पुत्र भरत खुशी से अभिभूत होकर अचानक जमीन पर गिर पड़े और खुशी से बेहोश हो गए।
 
As soon as Hanuman said this, Kaikeyi's son Bharata suddenly fell down on the ground overwhelmed with joy and became unconscious with happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)