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ramayan 6.125.34-35h: अयोध्या के वे धर्मात्मा नागरिक भी वस्त्र और काले मृगचर्म धारण करने वाले राजकुमार भरत को उस अवस्था में छोड़कर स्वयं सुख भोगना नहीं चाहते थे ॥34 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  6.125.34-35h 
नहि ते राजपुत्रं तं चीरकृष्णाजिनाम्बरम्॥ ३४॥
परिभोक्तुं व्यवस्यन्ति पौरा वै धर्मवत्सला:।
 
 
अनुवाद
अयोध्या के वे धर्मात्मा नागरिक भी वस्त्र और काले मृगचर्म धारण करने वाले राजकुमार भरत को उस अवस्था में छोड़कर स्वयं सुख भोगना नहीं चाहते थे ॥34 1/2॥
 
Even those religious citizens of Ayodhya did not wish to leave Prince Bharat, who was wearing clothes and black deerskin, in that condition and enjoy the pleasures themselves. ॥ 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)