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ramayan 6.125.20: जिस प्रकार गरुड़ बड़े सर्प को पकड़ने के लिए बड़े वेग से उस पर झपटते हैं, उसी प्रकार पवनपुत्र हनुमान बड़े वेग से उड़े।   |   ramayan सर्ग 6.125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.125.20 
अथोत्पपात वेगेन हनूमान् मारुतात्मज:।
गरुत्मानिव वेगेन जिघृक्षन्नुरगोत्तमम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार गरुड़ बड़े सर्प को पकड़ने के लिए बड़े वेग से उस पर झपटते हैं, उसी प्रकार पवनपुत्र हनुमान बड़े वेग से उड़े।
 
Just as Garuda pounces upon a great serpent with great speed to catch it, in the same manner Hanuman, the son of the wind, flew with great speed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)