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ramayan 6.125.12-13: हे सज्जन! फिर भरत से कहो कि शत्रुओं को परास्त करके, उत्तम यश पाकर, अपनी मनोकामना पूर्ण करके, राम राक्षसराज विभीषण, वानरराज सुग्रीव तथा अपने अन्य पराक्रमी मित्रों के साथ प्रयाग में आकर पहुँच गए हैं॥12-13॥   |   ramayan सर्ग 6.125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 125: हनुमान्जी का निषादराज गुह तथा भरतजी को श्रीराम के आगमन की सूचना देना और प्रसन्न हुए भरत का उन्हें उपहार देने की घोषणा करना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  6.125.12-13 
उपयातं च मां सौम्य भरताय निवेदय।
सह राक्षसराजेन हरीणामीश्वरेण च॥ १२॥
जित्वा शत्रुगणान् राम: प्राप्य चानुत्तमं यश:।
उपायाति समृद्धार्थ: सह मित्रैर्महाबलै:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे सज्जन! फिर भरत से कहो कि शत्रुओं को परास्त करके, उत्तम यश पाकर, अपनी मनोकामना पूर्ण करके, राम राक्षसराज विभीषण, वानरराज सुग्रीव तथा अपने अन्य पराक्रमी मित्रों के साथ प्रयाग में आकर पहुँच गए हैं॥12-13॥
 
Gentle! Then tell Bharata that after defeating the enemies, after getting the best fame, Rama, after fulfilling his wishes, is coming along with the demon king Vibhishan, the monkey king Sugreev and his other mighty friends and has reached Prayag.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)