श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 124: श्रीराम का भरद्वाज आश्रम पर उतरकर महर्षि से मिलना और उनसे वर पाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.124.9 
सर्वं च सुखदु:खं ते विदितं मम राघव।
यत् त्वया विपुलं प्राप्तं जनस्थाननिवासिना॥ ९॥
 
 
अनुवाद
रघुवीर! जनस्थान में रहते हुए तुमने जो सुख-दुःख सहे हैं, उन्हें मैं जानता हूँ॥9॥
 
Raghuveer! I know all the joys and sorrows you have endured while living in Janasthan.॥ 9॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas