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ramayan 6.124.23: तत्पश्चात् वे सहस्रों महावानर हर्ष में भरकर स्वर्ग के देवताओं के समान अपनी रुचि के अनुसार उन असंख्य दिव्य फलों का आनन्दपूर्वक स्वाद लेने लगे॥23॥   |   ramayan सर्ग 6.124: श्रीराम का भरद्वाज आश्रम पर उतरकर महर्षि से मिलना और उनसे वर पाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 124: श्रीराम का भरद्वाज आश्रम पर उतरकर महर्षि से मिलना और उनसे वर पाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.124.23 
तत: प्रहृष्टा: प्लवगर्षभास्ते
बहूनि दिव्यानि फलानि चैव।
कामादुपाश्नन्ति सहस्रशस्ते
मुदान्विता: स्वर्गजितो यथैव॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे सहस्रों महावानर हर्ष में भरकर स्वर्ग के देवताओं के समान अपनी रुचि के अनुसार उन असंख्य दिव्य फलों का आनन्दपूर्वक स्वाद लेने लगे॥23॥
 
Then, filled with joy, those thousands of great monkeys started tasting those innumerable divine fruits happily according to their taste, like heavenly gods. 23॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे चतुर्विंशत्यधिकशततम: सर्ग: ॥ १ २४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ चौबीसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ २४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)