Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.124.19-20h: हे प्रभु! यहाँ से अयोध्या जाते समय मार्ग में जितने भी वृक्ष हों, उन पर समय न होने पर भी फल लगें और उन सबमें से मधु टपके। उन पर नाना प्रकार के अमृततुल्य सुगन्धित फल लगें।॥19 1/2॥ | ramayan सर्ग 6.124: श्रीराम का भरद्वाज आश्रम पर उतरकर महर्षि से मिलना और उनसे वर पाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अकालफलिनो वृक्षा: सर्वे चापि मधुस्रवा:।
फलान्यमृतगन्धीनि बहूनि विविधानि च॥ १९॥
भवन्तु मार्गे भगवन्नयोध्यां प्रति गच्छत:।
अनुवाद
हे प्रभु! यहाँ से अयोध्या जाते समय मार्ग में जितने भी वृक्ष हों, उन पर समय न होने पर भी फल लगें और उन सबमें से मधु टपके। उन पर नाना प्रकार के अमृततुल्य सुगन्धित फल लगें।॥19 1/2॥
‘O Lord! While going from here to Ayodhya, may all the trees on the way bear fruits even when there is no time and may all of them drip honey. May many kinds of nectar-like fragrant fruits grow on them.’॥19 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥