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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 124: श्रीराम का भरद्वाज आश्रम पर उतरकर महर्षि से मिलना और उनसे वर पाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.124.10 
ब्राह्मणार्थे नियुक्तस्य रक्षत: सर्वतापसान्।
रावणेन हृता भार्या बभूवेयमनिन्दिता॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘वहां रहकर आप ब्राह्मणों के कार्य में संलग्न रहते हुए समस्त तपस्वी ऋषियों की रक्षा करते थे। उस समय रावण ने आपकी पतिव्रता पत्नी का हरण कर लिया।
 
‘While staying there you used to protect all the ascetic sages while being involved in the work of the Brahmins. At that time Ravana abducted your virtuous and faithful wife.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)