श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.123.7 
विद्युन्माली हतश्चात्र सुषेणेन महात्मना।
लक्ष्मणेनेन्द्रजिच्चात्र रावणिर्निहतो रणे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यहीं पर महापुरुष सुषेण ने विद्युन्माली का वध किया था और इसी युद्धभूमि में लक्ष्मण ने रावणपुत्र इन्द्रजित् का वध किया था ॥7॥
 
It was here that great man Sushen had killed Vidyunmali and in this same battlefield Lakshman had killed Ravana's son Indrajit. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)