श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.123.33 
सुग्रीवस्य वच: श्रुत्वा तारा सर्वाङ्गशोभना।
आहूय चाब्रवीत् सर्वा वानराणां तु योषित:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव के ये वचन सुनकर सुन्दरी तारा ने समस्त वानर-पत्नियों को बुलाकर कहा-॥33॥
 
Hearing these words of Sugriva, the beautiful Tara called all the monkey-wives and said-॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)