श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 123: अयोध्या की यात्रा करते समय श्रीराम का सीताजी को मार्ग के स्थान दिखाना  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  6.123.24-25 
सुग्रीवप्रियभार्याभिस्ताराप्रमुखतो नृप॥ २४॥
अन्येषां वानरेन्द्राणां स्त्रीभि: परिवृता ह्यहम्।
गन्तुमिच्छे सहायोध्यां राजधानीं त्वया सह॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मैं सुग्रीव की प्रिय तारा आदि पत्नियों तथा अन्य वानरराजों की पत्नियों के साथ आपके साथ अपनी राजधानी अयोध्या जाना चाहता हूँ।*॥24-25॥
 
Maharaj! I wish to accompany you to my capital Ayodhya, along with Sugreev's beloved wives like Tara and the wives of other monkey lords.'*॥ 24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)