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ramayan 6.122.5: 'दैत्यराज! ये वीर वानर युद्ध से कभी पीछे नहीं हटते और सदैव हर्ष और उत्साह से भरे रहते हैं। मृत्यु से निडर होकर लड़ने वाले इन वानरों की सहायता से ही आपने लंका पर विजय प्राप्त की है।   |   ramayan सर्ग 6.122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.122.5 
सहामीभिस्त्वया लङ्का निर्जिता राक्षसेश्वर।
हृष्टै: प्राणभयं त्यक्त्वा संग्रामेष्वनिवर्तिभि:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'दैत्यराज! ये वीर वानर युद्ध से कभी पीछे नहीं हटते और सदैव हर्ष और उत्साह से भरे रहते हैं। मृत्यु से निडर होकर लड़ने वाले इन वानरों की सहायता से ही आपने लंका पर विजय प्राप्त की है।
 
‘Lord of demons! These brave monkeys never retreat from a battle and are always full of joy and enthusiasm. With the help of these monkeys who fight without fear of death, you have conquered Lanka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)