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ramayan 6.122.3: तब पराक्रमी श्री रघुनाथजी ने कुछ विचार करके लक्ष्मणजी को सुनते हुए उनसे ये स्नेहपूर्ण वचन कहे-॥3॥   |   ramayan सर्ग 6.122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.122.3 
तमब्रवीन्महातेजा लक्ष्मणस्योपशृण्वत:।
विमृश्य राघवो वाक्यमिदं स्नेहपुरस्कृतम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तब पराक्रमी श्री रघुनाथजी ने कुछ विचार करके लक्ष्मणजी को सुनते हुए उनसे ये स्नेहपूर्ण वचन कहे-॥3॥
 
Then the mighty Sri Raghunath, after giving some thought, said these affectionate words to Lakshman while he was listening -॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)