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ते सर्वे वानरर्क्षाश्च राक्षसाश्च महाबला:।
यथासुखमसम्बाधं दिव्ये तस्मिन्नुपाविशन्॥ २७॥
अनुवाद
वे सभी वानर, भालू और महाबली राक्षस उस दिव्य विमान में सुखपूर्वक बैठे थे। किसी को किसी से धक्का-मुक्की नहीं करनी पड़ी॥27॥
All those monkeys, bears and mighty demons were sitting comfortably in that divine plane. No one had to push against anyone else.॥ 27॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे द्वाविंशत्यधिकशततम: सर्ग: ॥ १ २२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ बाईसवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ २२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥