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ramayan 6.122.22: ‘मित्रो! यदि मैं आप सब मित्रों के साथ अयोध्यापुरी जा सकूँ, तो यह मेरे लिए सबसे प्रिय वस्तु होगी - सबसे प्रिय वस्तु का लाभ। इससे मुझे महान सुख होगा॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 6.122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.122.22 
प्रियात् प्रियतरं लब्धं यदहं ससुहृज्जन:।
सर्वैर्भवद्भि: सहित: प्रीतिं लप्स्ये पुरीं गत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘मित्रो! यदि मैं आप सब मित्रों के साथ अयोध्यापुरी जा सकूँ, तो यह मेरे लिए सबसे प्रिय वस्तु होगी - सबसे प्रिय वस्तु का लाभ। इससे मुझे महान सुख होगा॥ 22॥
 
‘Friends! This will be the dearest thing for me – the gain of the most dear thing, if I can go to Ayodhyapuri with all of you friends. This will give me great happiness.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)