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ramayan 6.122.20: नृपश्रेष्ठ! राज्याभिषेक के समय मन्त्रपूत जल से भीगी आपकी मूर्ति का दर्शन करके, माता कौशल्या के चरणों में मस्तक नवाकर हम शीघ्र ही अपने घर लौट जाएँगे॥20॥   |   ramayan सर्ग 6.122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.122.20 
दृष्ट्वा त्वामभिषेकार्द्रं कौसल्यामभिवाद्य च।
अचिरादागमिष्याम: स्वगृहान् नृपसत्तम॥ २०॥
 
 
अनुवाद
नृपश्रेष्ठ! राज्याभिषेक के समय मन्त्रपूत जल से भीगी आपकी मूर्ति का दर्शन करके, माता कौशल्या के चरणों में मस्तक नवाकर हम शीघ्र ही अपने घर लौट जाएँगे॥20॥
 
Nrupashrestha! At the time of coronation, after having a glimpse of your idol drenched in Mantraput water, we will return to our home soon after bowing our heads at the feet of Mata Kausalya. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)