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ramayan 6.122.17: ‘अब इसी समय मैं अपने पिता की राजधानी अयोध्या जाऊँगा। इसके लिए मैं आप सब से अनुरोध कर रहा हूँ और सबकी अनुमति चाहता हूँ।’॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.122.17 
अयोध्यां प्रति यास्यामि राजधानीं पितुर्मम।
अभ्यनुज्ञातुमिच्छामि सर्वानामन्त्रयामि व:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘अब इसी समय मैं अपने पिता की राजधानी अयोध्या जाऊँगा। इसके लिए मैं आप सब से अनुरोध कर रहा हूँ और सबकी अनुमति चाहता हूँ।’॥17॥
 
‘Now at this time I will go to my father's capital Ayodhya. For this I am asking all of you and want everyone's permission.'॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)