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ramayan 6.122.15: हे मित्र सुग्रीव! तुमने वह सब कार्य किया है जो एक शुभचिंतक और प्रिय मित्र को करना चाहिए; क्योंकि तुम अनिष्ट से डरते हो॥15॥   |   ramayan सर्ग 6.122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 122: श्रीराम की आज्ञा से विभीषण द्वारा वानरों का विशेष सत्कार तथा सुग्रीव और विभीषण सहित वानरों को साथ लेकर श्रीराम का पुष्पकविमान द्वारा अयोध्या को प्रस्थान करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.122.15 
यत् तु कार्यं वयस्येन स्निग्धेन च हितेन च।
कृतं सुग्रीव तत् सर्वं भवताधर्मभीरुणा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे मित्र सुग्रीव! तुमने वह सब कार्य किया है जो एक शुभचिंतक और प्रिय मित्र को करना चाहिए; क्योंकि तुम अनिष्ट से डरते हो॥15॥
 
Friend Sugreeva! You have done all the work that a well-wisher and loving friend should do; because you are afraid of evil.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)