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ramayan 6.121.4: विभीषण के ऐसा कहने पर श्री रामचन्द्रजी ने उनसे कहा - 'मित्र! तुम सुग्रीव आदि वानर योद्धाओं से स्नान के लिए अनुरोध करो॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.121.4 
एवमुक्तस्तु काकुत्स्थ: प्रत्युवाच विभीषणम्।
हरीन् सुग्रीवमुख्यांस्त्वं स्नानेनोपनिमन्त्रय॥ ४॥
 
 
अनुवाद
विभीषण के ऐसा कहने पर श्री रामचन्द्रजी ने उनसे कहा - 'मित्र! तुम सुग्रीव आदि वानर योद्धाओं से स्नान के लिए अनुरोध करो॥4॥
 
When Vibhishan said this, Shri Ramchandraji said to him - 'Friend! You request Sugriva and other monkey warriors for a bath. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)