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ramayan 6.121.27: विश्वकर्मा द्वारा निर्मित वह विमान सुमेरु के शिखर के समान ऊँचा था और मोतियों तथा चाँदी से सुसज्जित विशाल कक्षों से सुशोभित था॥ 27॥   |   ramayan सर्ग 6.121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.121.27 
तं मेरुशिखराकारं निर्मितं विश्वकर्मणा।
बृहद्भिर्भूषितं हर्म्यैर्मुक्तारजतशोभितै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
विश्वकर्मा द्वारा निर्मित वह विमान सुमेरु के शिखर के समान ऊँचा था और मोतियों तथा चाँदी से सुसज्जित विशाल कक्षों से सुशोभित था॥ 27॥
 
That aircraft built by Vishwakarma was as high as the peak of Sumeru and was adorned with large rooms decorated with pearls and silver.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)