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श्लोक  6.121.21 
अनुजानीहि मां सौम्य पूजितोऽस्मि विभीषण।
मन्युर्न खलु कर्तव्य: सखे त्वां चानुमानये॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे विभीषण! अब आप मुझे जाने की अनुमति दें। आपने मेरा बहुत आदर किया है। मित्र! मेरे इस हठ के कारण मुझ पर क्रोध न करें। इसके लिए मैं आपसे बार-बार प्रार्थना करता हूँ।
 
Gentle Vibhishan! Now you should allow me to go. I have been honoured by you a lot. Friend! Do not be angry with me for this stubbornness of mine. I request you again and again for this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)