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ramayan 6.121.17: वीर! तुमने मेरे परम मित्र और उत्तम सचिव बनकर सब प्रकार के प्रयत्नों से मेरा आदर और पूजन किया है॥ 17॥   |   ramayan सर्ग 6.121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.121.17 
पूजितोऽस्मि त्वया वीर साचिव्येन परेण च।
सर्वात्मना च चेष्टाभि: सौहार्देन परेण च॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वीर! तुमने मेरे परम मित्र और उत्तम सचिव बनकर सब प्रकार के प्रयत्नों से मेरा आदर और पूजन किया है॥ 17॥
 
Veer! By becoming my best friend and excellent secretary, you have honoured and worshipped me by all kinds of efforts.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)