Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.121.12-13: 'श्रीराम! यदि आप मुझे अपनी कृपा का पात्र समझते हैं, मुझमें कुछ गुण देखते या मानते हैं तथा मुझ पर आपकी कृपादृष्टि है, तो आप अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता सहित कुछ दिन यहाँ निवास करें। मैं आपकी इच्छित समस्त वस्तुओं से आपका स्वागत करूँगा। मेरा स्वागत स्वीकार करके आप अयोध्या अवश्य पधारें।॥12-13॥ | ramayan सर्ग 6.121: श्रीराम का अयोध्या जाने के लिये उद्यत होना और उनकी आज्ञा से विभीषण का पुष्पक विमान को मँगाना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहं ते यद्यनुग्राह्यो यदि स्मरसि मे गुणान्।
वस तावदिह प्राज्ञ यद्यस्ति मयि सौहृदम्॥ १२॥
लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा वैदेह्या भार्यया सह।
अर्चित: सर्वकामैस्त्वं ततो राम गमिष्यसि॥ १३॥
अनुवाद
'श्रीराम! यदि आप मुझे अपनी कृपा का पात्र समझते हैं, मुझमें कुछ गुण देखते या मानते हैं तथा मुझ पर आपकी कृपादृष्टि है, तो आप अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता सहित कुछ दिन यहाँ निवास करें। मैं आपकी इच्छित समस्त वस्तुओं से आपका स्वागत करूँगा। मेरा स्वागत स्वीकार करके आप अयोध्या अवश्य पधारें।॥12-13॥
‘Shri Ram! If you consider me worthy of your kindness, see or acknowledge some qualities in me and you have goodwill towards me, then stay here for a few days with your brother Lakshman and wife Sita. I will welcome you with all the things you desire. After accepting my welcome, you must come to Ayodhya.॥ 12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥