श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 120: श्रीराम के अनुरोध से इन्द्र का मरे हुए वानरों को जीवित करना, देवताओं का प्रस्थान और वानर सेना का विश्राम  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.120.9 
नीरुजो निर्व्रणांश्चैव सम्पन्नबलपौरुषान्।
गोलाङ्गूलांस्तथर्क्षांश्च द्रष्टुमिच्छामि मानद॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे दूसरों को सम्मान देने वाले देवराज! मैं उन वानरों, वानरों और भालुओं को स्वस्थ, घाव रहित, बल और पराक्रम से युक्त देखना चाहता हूँ॥ 9॥
 
O Devraj who gives respect to others! I want to see those monkeys, apes and bears healthy, without wounds and full of strength and valour.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)