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मत्प्रियेष्वभिरक्ताश्च न मृत्युं गणयन्ति ये।
त्वत्प्रसादात् समेयुस्ते वरमेतमहं वृणे॥ ८॥
अनुवाद
जो वानर सदैव मेरा हित करने में लगे रहते थे और मृत्यु को कुछ भी नहीं समझते थे, वे सब आपकी कृपा से पुनः मुझे मिलें - यही वर मैं चाहता हूँ ॥8॥
The monkeys who were always engaged in doing good to me and did not consider death as anything, may they all meet me again by your grace - this is the boon I seek. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥