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श्लोक  6.120.7 
विक्रान्ताश्चापि शूराश्च न मृत्युं गणयन्ति च।
कृतयत्ना विपन्नाश्च जीवयैतान् पुरंदर॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"पुरंदर! वे वीर और बहादुर थे और मृत्यु को कुछ भी नहीं समझते थे। उन्होंने मेरे लिए बहुत प्रयास किए और अंततः मृत्यु के मुख में चले गए। कृपया उन सभी को पुनर्जीवित करें।"
 
‘Purandara! They were valiant and brave and did not consider death as anything. They have made great efforts for me and have finally gone to the jaws of death. Please bring them all back to life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)