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श्लोक  6.120.2 
अमोघं दर्शनं राम तवास्माकं नरर्षभ।
प्रीतियुक्ता: स्म तेन त्वं ब्रूहि यन्मनसेप्सितम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे नरश्रेष्ठ श्री राम! आपको जो हमारे दर्शन हुए, वह व्यर्थ नहीं जाना चाहिए और हम आपसे बहुत प्रसन्न हैं। अतः आप जो चाहें, मुझसे कहिए।'
 
O best of men, Shri Ram! The fact that you got to see us should not go waste and we are very happy with you. So tell me whatever you wish for.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)