श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 120: श्रीराम के अनुरोध से इन्द्र का मरे हुए वानरों को जीवित करना, देवताओं का प्रस्थान और वानर सेना का विश्राम  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.120.15 
सुहृद्भिर्बान्धवैश्चैव ज्ञातिभि: स्वजनेन च।
सर्व एव समेष्यन्ति संयुक्ता: परया मुदा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘तुम सब लोग आनन्द से परिपूर्ण हो जाओगे और अपने मित्रों, सम्बन्धियों, जाति-बंधुओं और सम्बन्धियों से मिलोगे ॥15॥
 
‘All of you will be filled with bliss and will meet your friends, relatives, caste-brothers and relatives. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)