श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 120: श्रीराम के अनुरोध से इन्द्र का मरे हुए वानरों को जीवित करना, देवताओं का प्रस्थान और वानर सेना का विश्राम  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.120.14 
नीरुजो निर्व्रणाश्चैव सम्पन्नबलपौरुषा:।
समुत्थास्यन्ति हरय: सुप्ता निद्राक्षये यथा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘जागने पर सभी वानर स्वस्थ, घाव रहित और बलवान होकर उठेंगे, जैसे मनुष्य नींद से जागने पर उठते हैं।॥14॥
 
‘On waking up, all the monkeys will get up healthy, without wounds and full of strength, just like human beings who wake up from sleep.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)