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ramayan 6.120.12: हे रघुवंशी अर्जुन! आपने जो वर माँगा है, वह बहुत बड़ा है; तथापि मैंने कभी भी द्विधा में बात नहीं की है; अतः यह वर अवश्य ही पूर्ण होगा॥ 12॥   |   ramayan सर्ग 6.120: श्रीराम के अनुरोध से इन्द्र का मरे हुए वानरों को जीवित करना, देवताओं का प्रस्थान और वानर सेना का विश्राम   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.120.12 
महानयं वरस्तात यस्त्वयोक्तो रघूत्तम।
द्विर्मया नोक्तपूर्वं च तस्मादेतद् भविष्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे रघुवंशी अर्जुन! आपने जो वर माँगा है, वह बहुत बड़ा है; तथापि मैंने कभी भी द्विधा में बात नहीं की है; अतः यह वर अवश्य ही पूर्ण होगा॥ 12॥
 
Father! O Arjuna of the Raghuvansha! The boon you have asked for is a very big one, however I have never spoken in two minds; therefore this boon will surely come true.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)