श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 120: श्रीराम के अनुरोध से इन्द्र का मरे हुए वानरों को जीवित करना, देवताओं का प्रस्थान और वानर सेना का विश्राम  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.120.11 
श्रुत्वा तु वचनं तस्य राघवस्य महात्मन:।
महेन्द्र: प्रत्युवाचेदं वचनं प्रीतिसंयुतम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
महात्मा श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर महेंद्र ने प्रसन्नतापूर्वक इस प्रकार उत्तर दिया-॥11॥
 
On hearing these words of Mahatma Sri Raghunathji, Mahendra happily replied thus -॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)