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ramayan 6.120.10: जहाँ ये वानर रहते हों, वहाँ बेऋतु में भी फल, मूल और फूलों की प्रचुरता हो और निर्मल जल वाली नदियाँ बहती रहें।॥10॥   |   ramayan सर्ग 6.120: श्रीराम के अनुरोध से इन्द्र का मरे हुए वानरों को जीवित करना, देवताओं का प्रस्थान और वानर सेना का विश्राम   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.120.10 
अकाले चापि पुष्पाणि मूलानि च फलानि च।
नद्यश्च विमलास्तत्र तिष्ठेयुर्यत्र वानरा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जहाँ ये वानर रहते हों, वहाँ बेऋतु में भी फल, मूल और फूलों की प्रचुरता हो और निर्मल जल वाली नदियाँ बहती रहें।॥10॥
 
Wherever these monkeys live, there should be abundance of fruits, roots and flowers even in the off-season and rivers with clear water should keep flowing.'॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)