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ramayan 6.120.1: महाराज दशरथ के लौट आने पर पक्षासन इन्द्र बहुत प्रसन्न हुए और हाथ जोड़कर खड़े हुए श्री रघुनाथजी से बोले- 1॥   |   ramayan सर्ग 6.120: श्रीराम के अनुरोध से इन्द्र का मरे हुए वानरों को जीवित करना, देवताओं का प्रस्थान और वानर सेना का विश्राम   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.120.1 
प्रतिप्रयाते काकुत्स्थे महेन्द्र: पाकशासन:।
अब्रवीत् परमप्रीतो राघवं प्राञ्जलिं स्थितम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
महाराज दशरथ के लौट आने पर पक्षासन इन्द्र बहुत प्रसन्न हुए और हाथ जोड़कर खड़े हुए श्री रघुनाथजी से बोले- 1॥
 
After the return of Maharaj Dashrath, Pakshasan Indra became very happy and said to Shri Raghunathji, standing with folded hands - 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)